अध्याय 156 निर्वासित

विक्टोरिया को लिली हमेशा से बेहद प्यारी रही थी। जब मैंडी ने सज़ा देने के लिए मिया का कान बेरहमी से मरोड़ा, तो विक्टोरिया के भीतर ग़ुस्सा उमड़ पड़ा। वह तो जैसे मैंडी के परखचे उड़ाने को तैयार थी।

मैंडी ने कभी सोचा नहीं था कि वह पकड़ी जाएगी। उसने जानबूझकर विक्टोरिया और हैरिसन के एस्टेट से निकलते ही इं...

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